Sunday, April 26, 2026

ममता की बुनावट और मेरी यादें

आज पुराने ब्लॉग की एक पोस्ट और ये तस्वीरें सामने आईं, तो दिल भर आया। साल 2013 की वे यादें, जब मेरी माँ आई.सी.यू. में अपनी सेहत से लड़ रही थीं और मैं उनके बगल में बैठकर धागों से उम्मीदें बुन रही थी। उस समय मैं माँ के लिए 'पाइनएप्पल स्क्वायर' (Pineapple Square) बना रही थी। वह सिर्फ़ एक डिज़ाइन नहीं था, बल्कि माँ के प्रति मेरी सहानुभूति, प्यार और उनके ठीक होने की एक मूक प्रार्थना थी। माँ हमेशा चाहती थीं कि मैं यह हुनर सीखूँ, उन्होंने बहुत कोशिश भी की, लेकिन शायद तब मेरा मन कहीं और था। आज जब माँ हमारे बीच नहीं हैं, मैंने उनकी विरासत और यादों को सहेजने के लिए इस कला को सीखने का संकल्प लिया। मुझे गर्व है कि आज मैं 'ग्रेनी स्क्वायर्स' (Granny Squares) बनाना सीख गई हूँ और इसे करते हुए मुझे माँ की मौजूदगी का अहसास होता है। तब
और अब
तस्वीरों में दिख रही वह गुलाबी बुनावट और माँ का वह सानिध्य आज भी मुझे हिम्मत देता है। ये धागे सिर्फ़ ऊन के नहीं हैं, ये माँ और बेटी के उस अटूट रिश्ते के हैं जो समय के साथ और गहरे होते जा रहे हैं। माँ, आपकी बहुत याद आती है। आपकी दी हुई यह कला अब मेरी पहचान और सुकून है। xoxo